नए कृषि कानूनाें के विराेध में किसानाें के दिल्ली में प्रदर्शन काे 23 दिन हाे गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने शुक्रवार काे मध्यप्रदेश के किसान सम्मेलन में एक बार फिर कृषि कानूनाें की पुरजाेर वकालत करते हुए कहा, ‘अगर शंका है तो सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर बात करने के लिए तैयार हैं।’ पीएम मोदी ने कहा कि किसानों की उन मांगों को पूरा कर दिया गया है, जिन्हें बरसों से रोका गया था।
किसानों के लिए जो नए कानून बने हैं, ये राताेरात नहीं आए हैं। पिछले दो दशक से केंद्र, राज्य सरकार और संगठन इस पर मंथन कर रहे थे। पीएम ने कहा, ‘मैं सभी राजनीतिक दलों को कहना चाहता हूं कि आप अपना क्रेडिट अपने पास रखिए। आप मुझे क्रेडिट मत दो, आपके पुराने घोषणा-पत्रों को क्रेडिट देता हूं।
मुझे किसान के जीवन में आसानी चाहिए, समृद्धि चाहिए, किसानी में आधुनिकता चाहिए। कृपा कर किसानों को बरगलाना, भ्रमित करना छोड़ दीजिए।’ उन्होंने कहा, ‘सरकार बार-बार पूछ रही है, आपको कानून के किस प्रावधान में दिक्कत है, तो उन राजनीतिक दलों के पास कोई ठोस जवाब नहीं होता, यही इन दलों की सच्चाई है।’
मेरी इन बातों के बाद भी, सरकार के इन प्रयासों के बाद भी, अगर किसी को कोई आशंका है तो हम सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर, बहुत ही विनम्रता के साथ, देश के किसान के हित में, उनकी चिंता का निराकरण करने के लिए, हर मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार हैं।’ - नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
हम नहीं कर पाए, माेदी ने कैसे कर दिया...
जो लोग स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें 8 साल दबाए बैठे रहे, किसान उनसे जवाब मांगें
पीएम ने कहा, ‘किसानों की बातें करने वाले लोग कितने निर्दयी हैं, इसका बहुत बड़ा सबूत है स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट। ये लोग स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को आठ साल तक दबाए बैठे रहे। किसान आंदोलन करते थे, प्रदर्शन करते थे, लेकिन इन लोगों के पेट का पानी नहीं हिला। इन्होंने अपनी राजनीति बढ़ाने के लिए किसान का इस्तेमाल किया।
हमने फाइलों के ढेर में फेंक दी गई स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट निकाली और उसकी सिफारिशें लागू कीं।’ उन्हाेंने कहा, ‘मुझे लगता है उनको पीड़ा इस बात से नहीं कि कृषि कानूनों में सुधार क्यों हुआ, उन्हें तकलीफ तो इस बात से है कि जो काम हम कहते थे, लेकिन कर नहीं पाते थे, वो मोदी ने कैसे किया, मोदी ने क्यों किया। देश के किसानों को उन लोगों से जवाब मांगना चाहिए जो पहले अपने घोषणा-पत्रों में इन सुधारों की बात लिखते रहे।’
राहुल गांधी ने पूछा- और कितने अन्नदाता देंगे कुर्बानी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किसान आंदोलन के दौरान 22 किसानों की मौत को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राहुल ने सवाल किया, ‘और कितने अन्नदाताओं को कुर्बानी देनी होगी। कृषि विरोधी कानून कब खत्म किए जाएंगे।’
चिपकाे आंदाेलन के बहुगुणा का समर्थन किसानाें काे
चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा भी किसान आंदोलन के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि वह अन्नदाताओं की मांगों का समर्थन करते हैं। वे खाद्य सुरक्षा के सिपाही हैं, उनकी चिंताएं जायज हैं।
डीएमके, अन्य दलाें ने तमिलनाडु में भूख हड़ताल की: तमिलनाडु में विपक्षी दल डीएमके और उसके सहयाेगियाें ने किसानाें के आंदाेलन के समर्थन में शुक्रवार काे एक दिन की भूख हड़ताल की। वहीं, मुंबई में अखिल भारतीय किसान सभा ने कहा कि उसके सदस्य दिल्ली में आंदाेलन में शामिल हाेंगे।
एमएसपी हटाना होता तो रिपोर्ट लागू ही क्यों करते
प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने कहा, ‘मैं किसानों को विश्वास से कहता हूं कि हमने हाल में जो कृषि सुधार किए हैं, उसमें अविश्वास का कारण ही नहीं है, झूठ के लिए कोई जगह ही नहीं है। अगर हमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) हटाना होते तो स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू ही क्यों करते। छह महीने से ज्यादा का समय हो गया, जब ये कानून लागू किए गए थे। कानून बनने के बाद भी वैसे ही एमएसपी की घोषणा की गई, जैसे पहले की जाती थी।’
प्रदर्शन तेज करने पर विचार और कानूनी मशविरा कर रहे किसान
अखिल भारतीय किसान सभा पंजाब के मेजर सिंह पुनावाल ने कहा कि हम आंदाेलन तेज करने पर विचार कर रहे हैं। सुप्रीम काेर्ट के मामले काे लेकर कानूनी मशविरा किया जा रहा है। नाेटिस मिलने पर उसका जवाब देंगे।
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