कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर केजीपी-केएमपी इंटरचेंज के पास नेशनल हाईवे पर धरना दे रहे किसानों की सांकेतिक भूक हड़ताल के दूसरे दिन 11 अन्य किसान 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे। धरना स्थल पर रोज 11 किसान भूख हड़ताल पर बैठेंगे। जब तक उनके शीर्ष नेताओं का कोई आदेश नहीं आएगा। स्थानीय किसानों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है।
मंगलवार को धरना स्थल पर किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी पहुंचे। उन्होंने कहा यह आंदोलन केवल किसानों का नहीं, बल्कि शोषित, पीड़ित और उपेक्षित लोगों का है। जो आर्थिक गुलामी से आजादी चाहते हैं। उन्होंने कहा किसानों की जीत होगी और किसान विरोधी सरकार का घमंड चकनाचूर होगा। यह ऐतिहासिक आंदोलन है।
उन्होंने कहा बिना किसी महत्वाकांक्षा के किसान हित के लिए यह आंदोलन है। अखिल भारतीय किसान सभा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष रामनारायण ने कहा कि गूंगी बहरी सरकार का अहंकार तो टूटेगा पर थोड़ा समय लगेगा। सरकार किसानों की आवाज को अब दबा नहीं पाएगी क्यों कि किसान अब जाग चुका है।
उन्होंने कहा हमने पहले ही तय किया था कि जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाएंगी हम आंदोलन को तेज करते रहेंगे। स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि रास्ता किसानों ने नहीं प्रशासन ने रोका है। किसान तो दिल्ली जाना चाहते हैं, लेकिन सरकार पुलिस बल का दुरुपयोग कर किसानों को दिल्ली जाने से रोक रही है।
शासन और प्रशासन किसानों के आंदोलन को बदनाम करने का असफल प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सरकार को ध्यान रखना चाहिए। यह आंदोलन न बदनाम होने वाला है और न कमजोर।
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